धनतेरस कब है और धनतेरस का पर्व क्यों मनाया जाता है

धनतेरस भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। धनतेरस के दिन जो देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और इस दिन जो देवी लक्ष्मी की पूजा अपनी पूरी भक्ति के साथ करती है उसके घर में खुशियां और समृद्धिया आती है।

Dhanteras Complete Details in Hindi

धनतेरस 2018 में कब है? (When is Dhanteras in 2018)

धनतेरस का त्योहार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है और दिवाली के दो दिन पूर्व इस त्योहार को मनाया जाता है। इस वर्ष 2018 में धनतेरस (Dhanteras) 5 नवंबर 2018, सोमबार को मनाया जायगा

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धनतेरस का इतिहास (Dhanteras History in Hindi)

एक समय की बात है भगवान विष्णु मृत्युलोक में किसी कार्य करने के लिए जा रहे थे तो माता लक्ष्मी ने भी अपनी इच्छा जताई कि वे भी भगवान विष्णु के साथ मृत्युलोक जायेंगे। भगवान विष्नु ने माता लक्ष्मी के समक्ष एक शर्त रखी जिसमे उन्होंने कहा कि मैं जो कहूंगा आपको वही करना होगा तो माता लक्ष्मी राजी हो गई और वे भी भगवान विष्णु के साथ धरती पर चले गए।

थोड़े समय बाद वे दोनों एक जगह पर पहुंचे तभी भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से कहा कि मुझे दक्षिण दिशा की तरफ किसी कार्य में जाना है जब तक मैं ना आह जाऊ आपको रूकना होगा। भगवान विष्णु के जाने के बाद माता लक्ष्मी के मन में जिज्ञासा बढ़ी की आखिर उस दक्षिण दिशा में क्या है जो भगवान विष्णु मुझे यहाँ पर अकेले छोड़ कर चले गए।

अब माता लक्ष्मी से रहा ना गया और वे भी भगवान विष्णु के पीछे-पीछे चले गए। माता लक्ष्मी को रास्ते में सरसो का एक खेत दिखा जिसमे बहुत-सारे सरसो के फूल लेहरा रहे थे, इस खूबसूरत सरसो के फूलों को देखकर माता लक्ष्मी से रहा नही गया और एक फूल को तोड़कर अपना सृंगार करके आगे बढ़ने लगी और उसी रास्ते में एक गन्ने का खेत दिख जिसमे माता लक्ष्मी ने एक गन्ना तोड़ कर चूसने लगी। इसी बीच भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी को देख लिया और क्रोधित होकर माता लक्ष्मी को श्राप दे दिया कि तुमने जिस किसान की हानि करवाई उस किसान के 12 वर्ष तक सेवा करनी पड़ेगी और माता लक्ष्मी ने उस किसान और उसकी पत्नी की 12 वर्ष सेवा की जिससे उस किसान और उसकी पत्नी को खाने से लेकर किसी तरह की कोई दिक्कत नही हुई।

जब 12 वर्ष होते ही भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को लेने आई पर किसान और उसकी पत्नी माता लक्ष्मी को जाने नही देना चाहती थे। भगवान विष्णु ने कहा माता लक्ष्मी तो मेरे कहने पर ही यहा रूकी थी वरना माता लक्ष्मी को ना कोई अपने घर पर रोक पाया है और ना ही कोई रोक पाएगा।

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धनतेरस के पीछे पौराणिक कथाएं (Legends Behind Dhanteras in Hindi)

धनतेरस का पर्व मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा यह भी है कि राजा हिमा के बड़े बेटे के बारे में यह भविष्यवाणी की गई थी कि वह शादी के चौथे दिन एक सांप के काटने के पश्चात मारा जायगा। शादी के चौथे दिन उसकी पत्नी ने कमरे और पूरे घर में सोने के सिक्के सजा दिए और पूरे घर को दिये से सुंदर सजा दिया और अपने पति को सुलाने के लिए कहानियां और गाना गाने लगे।

जब यम देवता सांप बनकर घर में घुसने का प्रयास करने लगे तो सोने के सिक्के, दिया के तेज रोशनी से बहुत ज्यादा ही चमकने लगे और यम देवता घर में प्रवेश नही कर पाए और घर के बाहर बैठकर पूरी रात गाना सुनने लगे और सुबह होते ही चले गए। इसलिए धनतेरस के त्योहार मनाया जाता है और धनतेरस के पर्व को छोटी दीवाली भी कहा जाता है

वर्तमान समय में धनतेरस का पर्व किस तरह मनाया जा रहा है (How is the festival of Dussehra celebrating in the present time in Hindi)

धनतेरस के दिन सोने और चांदी के सिक्के खरीदे जाते है और बर्तनों से लेकर बहनों को भी खरीदा जाता है। धनतेरस के दिन कोई भी व्यक्ति कुछ खरीदे या ना खरीदे पर झाड़ू जरूर खरीदी जाती है क्योंकि मान्यता यह है कि धनतेरस के दिन जो भी झाड़ू खरीदता है उनके घर में माता लक्ष्मी का वास रहता है। धनतेरस के रात में महिलाएं घर के बाहर यम दिया जला कर रखते है।

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