Dussehra in Hindi – दशहरा क्यों मनाया जाता है

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भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है इन त्योहारों में सबसे प्रमुख त्योहार दशहरा है जिसे बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। आज हम जानेंगे कि दशहरा का पर्व क्यों मनाया जाता है और दशहरा पर्व किस दिन मनाया जाता हैDussehara in Hindi

Dussehra Essay in Hindi

दशहरा का क्या अर्थ है और दशहरा पर्व क्यों मनाया जाता है (what is the meaning of Dussehara and Why is the festival of Dussehra celebrated)

दशहरा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द ‘दश- हर’ से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ दस बुराइयों से छुटकारा पाना है। भगवान श्रीराम द्वारा अपनी अपहृत पत्नी को रावण पर जीत प्राप्त कर छुड़ाने के उपलक्ष्य में तथा अच्छाई की बुराई पर विजय, के प्रतीकात्मक रूप में दशहरा का पर्व मनाया जाता है।

दशहरा पर निबंध (Dussehra Essay in Hindi)

पूरे भारतवर्ष में दशहरा का त्योहार ख़ुशी और हर्षोल्लास के साथ विजयादशमी के दिन मनाया जाता है। दशहरा का त्योहार हिन्दुओ का प्रमुख त्योहारों में से एक है इस त्योहार को बुराई की अच्छाई के विजय के उपलक्ष्य से मनाया जाता है।

हिन्दू धर्म मे दो सबसे प्रचलित किवदंतियां है और इनमें बताया गया है कि दशहरा का त्योहार क्यों मनाया जाता है।

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दशहरा का पर्व मनाने के पीछे पहली किवदंती (The first legend behind celebrating the festival of Dussehra in hindi)

त्रेता युग के अंत मे भगवान श्रीराम का जन्म राजा दशरथ के महल अयोध्या में हुआ था। राजा दशरथ की 3 पत्नियां थी कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा। राजा दशरथ के 4 पुत्र थे। राम के माता कौशल्या, भरत के माता का नाम कैकेयी, लक्ष्मण व शत्रुघ्न के माता का नाम सुमित्रा था।

जब भगवान श्रीराम का राज्य अभिषेक होने वाला था तो यह बात कैकेयी को सही नही लग रहा था तब उन्होंने राजा दशरथ से इस बारे में बात करके भरत को राजा बनाने की बात करने लगे और राजा दशरत इस बात से राजी हो गए क्योंकि उन्होंने अपनी रानी कैकेयी को कुछ सालों पहले बचन दिया था।

राजा दशरथ ने राम और उनकी पत्नी माता सीता को 12 वर्ष का वनवास भेजने का आदेश दिया और उनके भाई लक्ष्मण ने भी रामचंद्र के साथ बनवास जाने का निर्णय किया। श्रीराम के बाद भरत के राजा बनने की बारी थी पर भरत राजा नही बने उन्होंने श्रीराम के चरण पादुका को राज सिंहासन पर रख दिया।

जब भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जंगल मे रह रहे थे तब लक्ष्मण जी ने रावण की बहन शूर्पणखा का नाक काट दिया गया और इस अपमान का बदला लेने के लियव शूर्पणखा द्वारा रावण को उकसाया गया और रावण ने सीता माता की चाह में माता सीता का अपहरण कर लिया गया। इसलिए भगवान श्रीराम और रावण में बहुत ही बड़ा युद्ध हुआ और रावण का वध कर दिया गया।

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दशहरा का पर्व मनाने के पीछे दूसरी किवदंती (The first legend behind celebrating the festival of Dussehra in hindi)

महिषासुर नाम का एक दुष्ट असुर था और वह असुर दंभ का पुत्र था जिसके अंदर अमर होने की इच्छा जन्म ले चुकी थी। महिषासुर ने भगवान ब्रह्मा की तपस्या की और इस तपस्या से भगवान ब्रह्मा खुश होकर महिषासुर के सामने प्रकट हुए और महिषासुर से कहा कि तुम्हे जो वरदान चाहिए वह मांगो। महिषासुर ने अमर होने का वरदान मांगा पर भगवान ब्रह्मा ने इस बात को टाल दिया कि जन्म के बाद मृत्यु और मृत्यु के बाद जन्म निश्चित है इसे कोई टाल नही सकता है।

महिषासुर ने तब भगवान ब्रह्मा से ऐसा वरदान मंगा जिसमे उसने कहा कि मेरी मृत्यु किसी किसी स्त्री के हाथों हो, कोई दैत्य, मानव या देवता, कोई भी मेरा वध ना कर पाए। भगवान ब्रह्मा ने उन्हें यह वरदान दे दिया।

ब्रह्मा जी से इस वरदान को पाकर महिषासुर ने भूलोक, देवलोक में अक्रमण कर दिया और उनपर जीत भी हासिल कर लिया। अब भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु के पास पहुँचे तब भगवान विष्णु ने कहा देवी शक्ति से मदद की गुहार लगाई। सभी देवताओं ने मिलकर देवी शक्ति को सहायता के लिए पुकारा और इतने में ही सभी देवताओं के शरीर में से निकले तेज ने एक अत्यंत खूबसूरत सुंदरी का रूप ले लिया।

जब यह बात महिषासुर को पता चली उसने देवी शक्ति को शादी का प्रस्ताव दिया जिसे देवी शक्ति अत्यंत क्रोधित होकर युद्ध की घोषणा कर दी। देवी शक्ति ने महिषासुर के पूरे सेना का विनाश कर दिया और 9 दिनों तक देवी शक्ति और महिषासुर का युद्ध चला जिसमे देवी शक्ति ने महिषासुर का वध कर दिया।

वर्तमान समय मे दशहरा का पर्व किस तरह मनाया जा रहा है (How is the festival of Dussehra celebrating in the present time in Hindi)

दशहरा का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के दसवें दिन शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। दशहरा के दिन रावण के पुतले को जलाया जाता है और यह पर्व भारत के साथ-साथ अन्य कई देशों में भी मनाया जाता है। इस नजारे को देखने के लिए लाखो लोग आते है।

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