एक आखरी नाम से पूरा रिश्ता ही बदल गया – Motivation Story

दोस्तों ! आज मेरे साथ एक गजब की घटना घटी है मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि किसी की लास्ट नाम (अंतिम नाम) से पूरा माहौल ही बदल सकता है | चलिये ! बीच से नहीं, मैं शुरू से Motivation Story कहानी को शुरू करता हूँ।

Last Name Se Pura Relationship Change Ho Gaya

आज मैं पटना से अपने गांव जाने के लिए बस पर चढ़ने वाला था लेकिन बस पर काफ़ी भीड़ होने की वजह से मैं सही तरीके से चढ़ नहीं पा रहा था तो एक आदमी ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर की ओर खींचा और मैं उसके पास जाकर बस में खड़ी हो गया। मैंने कुछ दूरी पैदल चल कर बस स्टैंड आया था और लगभग धूप भी कुछ अच्छे ही थी जिसके वजह से मैं पसीने से भीगा हुआ था।

पूरे चेहरे पर पसीना साफ दिख रहा था और मुझे इस भीड़ में और भी काफी गर्मी लग रही थी। मैं बस की सीट पर बैठने के लिए इधर-उधर के सीटों पर नजर दौड़ा आ रहा था । तभी मेरे पास में बैठे एक अंकल जिनकी उम्र शायद 55 की रही होगी देखने में अच्छे स्वभाव के नजर आ रहे थे।उन्होंने मुझे पसीने से भीगा हुआ देख कर या फिर पता नहीं उन्हें मुझ में ऐसा क्या दिखा की इतने लोगों में से वो सिर्फ मुझे खिड़की वाली सीट की तरफ बैठने के लिए बोला। जबकि उस सीट पर वह खुद बैठे हुए थे लेकिन फिर भी वो खुद को एडजस्ट करके वहां पर मुझे भी एडजस्ट कर दिए।

अब खिड़की वाली सीट पर बैठ कर काफी आरामदायक महसूस हो रहा था । बाहर की खुली हवा आ रही थी। बाल उड़ रहे थे , शर्ट की बटन खुली हुई थी , पसीने से भीगा हुआ बनियान कूलर जैसी महसूस करवा रही थी। तब अंकल जी ने कुछ बातचीत शुरू किया । मैंने उन्हें बताया कि अभी पढ़ाई कर रहा हूं और आज गांव जा रहा हूं । क्योंकि गांव यहां से हमारे काफी नजदीक है जिसके कारण हम 2 सप्ताह में कभी- कभार एक दो बार चले जाते हैं ।

बात – बात में उन्होंने भी बताया कि वह एक हाई स्कूल के शिक्षक है और वह अभी स्कूल से छुट्टी होने के बाद अपने घर जा रहे हैं ।बस रुकने के बाद अंकल जी ने सड़क किनारे बेच रहे पपीते वाले से पपीते लेने के लिए खिड़की के पास बुलाया और ₹20 की एक पुरानी नोट देकर पके हुए पपीते खरीदे । चुकी खिड़की के पास मैं था तो उस पपीते बेचने वाले से पपीते मैंने अपने हाथ में ले लिया और अंकल जी के हाथों में दे दिया।

अंकल जी मुझे पपीता खाने के लिए इशारा किया लेकिन अंकल जी मुझे पपीता खाने के लिए इशारा किया लेकिन मैंने मना कर दिया परंतु उन्हें दोबारा कहने के बाद हमने पपीता खाना शुरू कर दी । हम दोनों एक ही प्लेट में पपीता खा रहे थे । पता नहीं उन्हें आधे घंटे की बातचीत में यह कैसे पता चल गय की मैं एक अच्छा विद्यार्थी हूं और मेरा स्वभाव काफी अच्छा है ।

लेकिन बातचीत के बीच में उन्होंने अचानक मेरे पापा का नाम पूछें । मैंने झट से अपने पापा का नाम बता दिया , परंतु उन्होंने मेरे पापा की लास्ट नेम (अंतिम नाम ) पर जोर देते हुए फिर से दोबारा बोलने के लिए बोला। मैं फिर से अपने पापा का नाम बताया।

लेकिन इस बार उनकी बातचीत करने की अंदाज बिल्कुल बदल गया था । और कुछ ही देर बाद हम दोनों की बात बंद हो गई । अब मैं कुछ बोलता तो वह सभी का जवाब हूं या हां में दे रहे थे।

मुझे अब समझ में नहीं आ रही थी कि मेरे पापा के लास्ट नाम में क्या था जो पूरा का पूरा माहौल ही बदल गया।

खैर ! मुझे समझने मैं ज्यादा समय नहीं लगा।
बस अफसोस इस बात की हो रही थी की कोई शिक्षक भी जात – पात का विचार अपने दिमाग में कैसे ला सकता है ।

खैर ! संविधान बदल लो या शहर का नाम। जब तक अपने सोच नही बदलोगे तब तक इस देश का कुछ नहीं होगा।

यह Guest Post अविनाश अकेला द्वारा लिखा गया है और उनके website का नाम story baaz है। यदि आप भी हमारे website पर कहानियां प्रकाशित करना चाहते है तो यहाँ Submit Your Story पर जाए।

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1 Comment

  1. Story Babu द्वारा मेरे कहानी को प्रकाशित करने के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद ।

    वैसे यह मेरा real कहानी हैं जो मेरे साथ घटित हुआ है ।

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